8 साल बाद विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियां, विकास को मिलेगी रफ्तार या फिर उठेंगे नए सवाल?
रीवा | वायरल भारत
मध्य प्रदेश सरकार ने करीब 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियां कर दी हैं। पूर्व विधायक पंचूलाल प्रजापति को प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि रीवा के डॉ. अजय सिंह और सतना के संजय तीर्थानी को उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन नियुक्तियों के बाद विंध्य क्षेत्र में विकास योजनाओं की उम्मीदें जगी हैं, वहीं विपक्ष ने इस फैसले पर कई सवाल भी खड़े किए हैं।
विंध्य के 10 जिलों के विकास की जिम्मेदारी
विंध्य विकास प्राधिकरण का गठन क्षेत्रीय विकास को गति देने के उद्देश्य से किया गया था। इसके अंतर्गत रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, उमरिया, मैहर, मऊगंज और डिंडौरी जिले आते हैं। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य आधारभूत संरचना, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का समन्वित विकास करना है।
8 साल बाद फिर सक्रिय हुआ प्राधिकरण
वर्ष 2017 के बाद से विंध्य विकास प्राधिकरण लगभग निष्क्रिय स्थिति में था। लंबे समय से इसके पुनर्गठन की मांग उठ रही थी। अब नई नियुक्तियों के साथ सरकार ने संकेत दिया है कि विंध्य क्षेत्र के विकास को लेकर नई रणनीति बनाई जाएगी।
बिना कार्यालय और बजट कैसे चलेगा विकास?
नई नियुक्तियों के साथ सबसे बड़ा सवाल प्राधिकरण के संसाधनों को लेकर उठ रहा है। वर्तमान में प्राधिकरण का कोई स्थायी कार्यालय नहीं है। पुराने कार्यालय की जगह अब आईटी पार्क का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके अलावा प्राधिकरण के लिए अलग से कोई बजट भी निर्धारित नहीं किया गया है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि बिना पर्याप्त संसाधनों और वित्तीय व्यवस्था के बड़े विकास लक्ष्यों को हासिल करना चुनौतीपूर्ण होगा।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
विपक्षी दल कांग्रेस ने इन नियुक्तियों को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि यह कदम राजनीतिक संतुलन साधने और असंतुष्ट नेताओं को समायोजित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
कांग्रेस का कहना है कि जब तक प्राधिकरण को पर्याप्त बजट, कार्यालय और प्रशासनिक अधिकार नहीं मिलते, तब तक विकास की योजनाएं धरातल पर उतरती नहीं दिखाई देंगी।
अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने जताया भरोसा
नवनियुक्त अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति और उपाध्यक्ष डॉ. अजय सिंह ने कहा है कि मुख्यमंत्री ने विंध्य क्षेत्र के विकास के लिए पूरा भरोसा जताया है। उन्होंने दावा किया कि जल्द ही क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार नई विकास योजनाएं तैयार की जाएंगी और बजट की कमी आड़े नहीं आने दी जाएगी।
2008 में हुई थी स्थापना
विंध्य क्षेत्र का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व हमेशा से रहा है। क्षेत्र के समग्र विकास के उद्देश्य से तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 27 सितंबर 2008 को विंध्य विकास प्राधिकरण की स्थापना की थी।
इसके बाद विभिन्न समय में प्राधिकरण के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष नियुक्त किए गए, लेकिन पिछले कई वर्षों से इसकी गतिविधियां लगभग ठप पड़ी थीं। अब नई नियुक्तियों के बाद एक बार फिर प्राधिकरण चर्चा में आ गया है।
क्या बदल पाएगी नई टीम विंध्य की तस्वीर?
विंध्य विकास प्राधिकरण में नई नियुक्तियों के बाद क्षेत्र के लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या नई टीम केवल राजनीतिक नियुक्ति बनकर रह जाएगी या फिर वास्तव में विंध्य के विकास को नई दिशा देने में सफल होगी।

Post a Comment