रीवा में खरीफ सीजन की खाद वितरण शुरू, किसानों को फिर सताने लगा कालाबाजारी का डर
रीवा। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही रीवा जिले में किसानों को यूरिया और डीएपी खाद का वितरण शुरू हो गया है। सहकारी समितियों और निजी उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से खाद उपलब्ध कराई जा रही है।
लेकिन वितरण केंद्रों पर बढ़ती भीड़ और पिछले साल की अव्यवस्थाओं को देखते हुए किसानों में एक बार फिर खाद की किल्लत और कालाबाजारी की आशंका बढ़ने लगी है।
जिले में खाद वितरण शुरू होते ही कई केंद्रों पर किसानों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। किसानों का कहना है कि बुवाई के समय खाद की मांग अचानक बढ़ जाती है।
और ऐसे में यदि समय पर पर्याप्त आपूर्ति नहीं हुई तो परेशानी बढ़ सकती है। पिछले वर्ष खाद वितरण के दौरान कई स्थानों पर विवाद और अव्यवस्था की स्थिति बनी थी, जिसकी याद अब भी किसानों के मन में ताजा है।
इस बीच रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने दावा किया है कि जिले में खाद का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है किसी भी किसान को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी प्रशासन द्वारा सभी वितरण केंद्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।
तथा कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। कलेक्टर ने कहा कि यदि कहीं भी अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर निगरानी व्यवस्था अभी भी कमजोर नजर आ रही है। कई किसानों का कहना है कि केवल कागजी निर्देशों से समस्या का समाधान नहीं होगा।
बल्कि वितरण केंद्रों पर पारदर्शिता और नियमित जांच जरूरी है ताकि जरूरतमंद किसानों को समय पर खाद मिल सके।
खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था को लेकर प्रशासन और किसानों दोनों की नजरें आने वाले दिनों पर टिकी हैं। यदि व्यवस्था सुचारू रही तो किसानों को राहत मिलेगी, लेकिन किसी भी प्रकार की लापरवाही से कालाबाजारी और संकट की स्थिति फिर पैदा हो सकती है।

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