संसद में गलत जानकारी देने पर क्या मंत्री के खिलाफ हो सकती है कार्रवाई? जानिए क्या कहते हैं नियम
नई दिल्ली | Viral Bharat
ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए पुराने बयान पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्ष ने बयान को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि मंत्री के वक्तव्य को संदर्भ से हटाकर पेश किया गया है और सोशल मीडिया पर भ्रामक तरीके से प्रचारित किया जा रहा है।
इसी बीच यह सवाल भी चर्चा में है कि यदि कोई मंत्री संसद में गलत या भ्रामक जानकारी देता है तो उसके खिलाफ क्या कार्रवाई हो सकती है। संसदीय नियमों के अनुसार, यदि किसी मंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगता है, तो संबंधित सदस्य विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे सकता है। इसके बाद मामले को स्पीकर या सभापति की अनुमति से विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जा सकता है, जो जांच कर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करती है।
यदि जांच में यह पाया जाता है कि मंत्री ने जानबूझकर सदन को गुमराह किया है, तो समिति अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश कर सकती है। हालांकि, किसी मंत्री को पद से हटाने का निर्णय स्वतः नहीं होता। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत केंद्रीय मंत्री प्रधानमंत्री की सलाह पर राष्ट्रपति के प्रति उत्तरदायी होते हैं और पद पर बने रहने या हटने का निर्णय संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार होता है।
रक्षा मंत्रालय ने इस विवाद पर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान को अधूरा उद्धृत कर गलत अर्थ निकाला गया। मंत्रालय के अनुसार, मंत्री का वक्तव्य एक विशेष संदर्भ में था और उसे पूरे भाषण के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
फिलहाल इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। सरकार और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष रख रहे हैं, जबकि इस विषय पर सार्वजनिक बहस भी तेज हो गई है।

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