रीवा/वायरल भारत। रीवा संभाग में गर्भवती महिलाओं के बीच एनीमिया (रक्ताल्पता) की समस्या चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है।
स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार संभाग में 2 हजार से अधिक गर्भवती महिलाएं गंभीर एनीमिया से पीड़ित हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इन महिलाओं के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर 7 ग्राम प्रति डेसीलीटर से भी कम पाया गया है, जो मां और गर्भ में पल रहे शिशु दोनों के लिए बड़ा खतरा माना जाता है।
रीवा जिले की स्थिति सबसे गंभीर
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार रीवा जिले में हालात सबसे अधिक चिंताजनक हैं। यहां 884 गर्भवती महिलाओं में गंभीर एनीमिया की पुष्टि हुई है। इसके अलावा सतना जिले में 567, सीधी जिले में 303 और सिंगरौली जिले में 246 गर्भवती महिलाएं गंभीर रक्ताल्पता से जूझ रही हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद रीवा संभाग की स्वास्थ्य सेवाओं और पोषण कार्यक्रमों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रदेश स्तरीय समीक्षा रिपोर्ट में भी यह बात सामने आई है कि गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं के उपचार और प्रबंधन के मामले में रीवा संभाग की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर है।
मां और शिशु दोनों के लिए खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान एनीमिया होने से प्रसव के समय जटिलताएं बढ़ जाती हैं। अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, थकान, समय से पहले प्रसव और शिशु के कम वजन के साथ जन्म लेने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। गंभीर मामलों में मां और बच्चे दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए सुधार के संकेत
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा है कि प्रभावित जिलों में विशेष अभियान चलाकर एनीमिया नियंत्रण पर काम किया जाएगा। गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, आयरन सप्लीमेंट और पोषण संबंधी जागरूकता कार्यक्रमों को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।

Post a Comment