🚨 CAG रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: मध्य प्रदेश के ₹60,113 करोड़ के उपयोगिता प्रमाण-पत्र अब तक लंबित
81 हजार से अधिक उपयोगिता प्रमाण-पत्र नहीं किए जमा, CAG ने वित्तीय निगरानी पर उठाए गंभीर सवाल
भोपाल | Viral Bharat
मध्य प्रदेश सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा वर्ष 2024-25 तक विकास योजनाओं और विशेष परियोजनाओं पर खर्च की गई बड़ी राशि के उपयोगिता प्रमाण-पत्र (Utilization Certificates) समय पर जमा नहीं किए जाने का मामला सामने आया है। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की राज्य वित्त रिपोर्ट 2024-25 में इस संबंध में गंभीर टिप्पणी की गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ₹60,113 करोड़ की राशि से जुड़े 81,000 से अधिक उपयोगिता प्रमाण-पत्र (UC) अब तक लंबित हैं। इनमें से 61,507 प्रमाण-पत्र (करीब 76%) केवल वर्ष 2024-25 से संबंधित हैं। इन योजनाओं पर लगभग ₹42,305 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन उनके उपयोग का प्रमाण अभी तक संबंधित विभागों ने प्रस्तुत नहीं किया है।
CAG ने जताई वित्तीय अनियमितता की आशंका
कैग ने कहा है कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर जमा न करना वित्तीय नियमों और सरकारी दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। इससे यह सुनिश्चित नहीं हो पाता कि आवंटित राशि वास्तव में निर्धारित उद्देश्य और लाभार्थियों तक पहुंची या नहीं।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार से मिलने वाले अनुदान और भविष्य की वित्तीय सहायता भी प्रभावित हो सकती है।
सामाजिक न्याय विभाग में भी गंभीर लापरवाही
कैग की जांच में सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग का मामला भी सामने आया है। वर्ष 2019 से 2024-25 के बीच विभाग ने नशामुक्ति अभियान, अंध-मूक-बधिर विद्यालयों और कुष्ठजन कल्याण योजनाओं पर लगभग ₹53.05 करोड़ खर्च किए, लेकिन इसके बदले केवल ₹5 लाख के उपयोगिता प्रमाण-पत्र ही प्रस्तुत किए गए।
विभाग ने जवाब में कहा कि प्रमाण-पत्र जिलों से प्राप्त होने के बाद जमा किए जाएंगे, लेकिन कैग ने इस स्पष्टीकरण को असंतोषजनक बताया क्योंकि कई प्रमाण-पत्र वर्षों से लंबित हैं।
सबसे अधिक लंबित उपयोगिता प्रमाण-पत्र वाले विभाग
🔹 पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास : ₹20,453 करोड़
🔹 सामाजिक न्याय एवं निशक्तजन कल्याण : ₹20,045 करोड़
🔹 ग्रामीण विकास विभाग : ₹8,051 करोड़
🔹 नगरीय विकास एवं आवास विभाग : ₹3,053 करोड़
🔹 खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग : ₹2,181 करोड़
CAG की सिफारिश
कैग ने राज्य सरकार को निर्देशित किया है कि उपयोगिता प्रमाण-पत्र समय पर प्रस्तुत कराने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए, लंबित मामलों की नियमित समीक्षा हो और देरी के लिए जवाबदेही तय की जाए, ताकि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।
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₹60,113 करोड़ का हिसाब अधूरा!
CAG रिपोर्ट में MP सरकार पर बड़े सवाल
81 हजार उपयोगिता प्रमाण-पत्र अब तक लंबित
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