E20 से आगे बढ़ेगा भारत! एथेनॉल क्रांति से बदल सकती है देश की ऊर्जा तस्वीर
नई दिल्ली
भारत अब केवल पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि इससे आगे बढ़कर स्वच्छ और आत्मनिर्भर ऊर्जा की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रहा है।
केंद्र सरकार एथेनॉल आधारित ईंधन के उपयोग को और बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम हो सके और किसानों की आय में भी वृद्धि हो।
भारत ने निर्धारित समय से पहले E20 मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर दुनिया को चौंका दिया है। अब नीति आयोग और संबंधित मंत्रालय E30 तथा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों जैसे विकल्पों पर भी विचार कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एथेनॉल के बढ़ते उपयोग से न केवल विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।
देश में एथेनॉल उत्पादन का मुख्य स्रोत गन्ना और अनाज आधारित फसलें हैं।
सरकार लगातार नई डिस्टिलरी परियोजनाओं को प्रोत्साहित कर रही है ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलने की संभावना भी बढ़ेगी।
हालांकि, विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि E20 से आगे बढ़ने के लिए कई चुनौतियों का समाधान जरूरी होगा। इनमें वाहनों की तकनीकी अनुकूलता, ईंधन वितरण नेटवर्क का विस्तार और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
सरकार इन चुनौतियों पर चरणबद्ध तरीके से काम कर रही है।
ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि भारत एथेनॉल आधारित अर्थव्यवस्था को सफलतापूर्वक विकसित कर लेता है, तो यह देश की ऊर्जा सुरक्षा को नई मजबूती देगा। साथ ही, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को हासिल करने में भी मदद मिलेगी।
भारत की यह एथेनॉल क्रांति आने वाले वर्षों में परिवहन और ऊर्जा क्षेत्र की तस्वीर बदल सकती है। सरकार की कोशिश है कि देश को आयातित ईंधन पर कम निर्भर बनाते हुए हरित ऊर्जा की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाए।

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