1907 में रीवा में पहली बार जला था बिजली का बल्ब, महाराजा के महल के लिए ब्रिटेन से मंगाया गया था बॉयलर
आज बिजली हर घर की जरूरत बन चुकी है, लेकिन विंध्य क्षेत्र में इसकी शुरुआत का इतिहास बेहद दिलचस्प है। वर्ष 1907 में रीवा में पहली बार बिजली का बल्ब जलाया गया था।
उस समय यह सुविधा आम जनता के लिए नहीं, बल्कि केवल रीवा महाराजा के राजमहल तक सीमित थी। महल को रोशन करने के लिए विशेष रूप से ब्रिटेन से बॉयलर मंगवाया गया, जिससे महल परिसर में ही बिजली का उत्पादन किया जाता था।
इतिहासकारों के अनुसार, रीवा के कोठी कंपाउंड स्थित व्यंकट भवन में सबसे पहले बिजली की रोशनी दिखाई दी। उस दौर में बिजली उत्पादन की पूरी व्यवस्था महल परिसर में स्थापित की गई थी और वहीं से राजमहल के विभिन्न हिस्सों को विद्युत आपूर्ति की जाती थी।
यह उस समय तकनीकी प्रगति का एक अनोखा उदाहरण था। रीवा में बिजली की शुरुआत केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं थी, बल्कि विंध्य क्षेत्र के आधुनिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी थी।
इसके बाद धीरे-धीरे बिजली व्यवस्था का विस्तार हुआ और आने वाले वर्षों में आम लोगों तक भी इसकी पहुंच बनी। आज रीवा का यह ऐतिहासिक अध्याय प्रदेश के गौरवशाली इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

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