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भारत ने बढ़ाया रूसी तेल आयात, ईरानी तेल की वापसी से पहले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की तैयारी

भारत ने बढ़ाया रूसी तेल आयात, ईरानी तेल की वापसी से पहले रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की तैयारी


नई दिल्ली। भारत का रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) का आयात जून महीने में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच सकता है। ऊर्जा बाजार की रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियां रूस से बड़ी मात्रा में सस्ता कच्चा तेल खरीद रही हैं। ऐसे समय में यह बढ़ोतरी देखने को मिल रही है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईरान के तेल की संभावित वापसी को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

रूस पिछले कुछ वर्षों से भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बावजूद भारत ने रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदना जारी रखा। मई 2026 में भी रूस भारत का शीर्ष तेल आपूर्तिकर्ता रहा और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 36 प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई।

विशेषज्ञों का मानना है कि मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति संबंधी अनिश्चितताओं के बीच भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने के लिए रूसी तेल पर भरोसा बढ़ा रहा है। वहीं, यदि ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील मिलती है और उसका तेल वैश्विक बाजार में लौटता है तो भारतीय कंपनियों के लिए एक नया विकल्प खुल सकता है।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत की तेल खरीद नीति मुख्य रूप से कीमत, उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिरता पर आधारित है। इसी वजह से रियायती रूसी तेल अभी भी भारतीय रिफाइनरियों की पहली पसंद बना हुआ है।

हालांकि, ईरान के तेल की वापसी और वैश्विक बाजार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा आने वाले महीनों में भारत की आयात रणनीति को प्रभावित कर सकती है। फिलहाल संकेत यही हैं कि जून में रूस से भारत का तेल आयात नया रिकॉर्ड बना सकता है।

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